परमपूज्य अतुलानंद आचार्य


 

परमपूज्य श्रीला अतुलानंद आचार्य ने दक्षिण अमेरिका के चिली देश में सेन्टिएगो में सन् 1951 में एक राजनयिक परिवार में जन्म लिया। भक्तजन आपको 'गुरुदेव' कहकर संबोधित करते हैं। आप स्वामी रामकृष्णानंद के शिक्षा गुरुओं में से एक हैं। अपनी जवानी के दिन में आपने कई देशों की यात्रा की और फिर अर्जेन्टीना में ब्यूनस एयर्स के विश्वविद्यालय में प्रविष्ट हुए, जहां आप गौड़िय वैष्णव धर्म के संपर्क में आए। उसके बाद परमपूज्य ए.सि. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद को अपना आध्यात्मिक गुरु मानकर वैदिक धर्म का अध्ययन करके अपना जीवन मिशन संबंधी कार्यों में समर्पित करने का निर्णय लिया। तत्पश्चात आप चिली लौटे, जहां अपने आध्यात्मिक गुरु के संदेश के प्रचार में मदद करने के लिए वहां के स्थाई निवासी बन गए।

 

सन् 1977 में हमारे रामकृष्णानंद स्वामी का मिलन परमपूज्य श्रीला अतुलानंद आचार्य से हुआ। वास्तविकता में, आचार्य प्रथम भक्तों में से थे जिन्होंने हमारे आध्यात्मिक गुरु को वैष्णव धर्म एवं भक्तियोग से परिचित कराया, और आध्यात्मिक एवं धार्मिक पथ का मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण दिया।

 

सन् 1977 में श्रीला प्रभुपाद के दुखद निधन के बाद श्रीला अतुलानंद आचार्य ने वैदिक ज्ञान को गहराई से जानने के लिए अपनी यात्राएं जारी रखी। सन् 1985 में आप अपनी पत्नी के साथ चिली लौटे एवं वहां के लोगों को वैदिक संस्कृति की अभूतपूर्व शिक्षा देने के लिए वहां पर स्थाई निवास किया।

 

आजकल आप गुरु एवं दीक्षा गुरु दोनों का कार्यभार संभाल रहे हैं, साथ ही 'वृन्दा' संस्थान के नेताओं में से एक हैं।