परमपूजà¥à¤¯
शà¥à¤°à¥€ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ विषà¥à¤£à¥
देवानंद
सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ रामकृषà¥à¤£à¤¾à¤¨à¤‚द
के जीवन में शिकà¥à¤·à¤¾ गà¥à¤°à¥à¤“ं
में बहà¥à¤¤ ही महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ थे
परमपूजà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€
विषà¥à¤£à¥ देवानंद। आप योग
वेदांत के
अंतरà¥à¤°à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ शिवानंद
केंदà¥à¤°à¥‹à¤‚ के संसà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤• थे।
आप हठयोग à¤à¤µà¤‚ राजयोग के
विशà¥à¤µ विखà¥à¤¯à¤¾à¤¤ अधिकारी
थे। सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤œà¥€ पूरी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾
में शांति के लिठकारà¥à¤¯à¤°à¤¤
अनेक संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾
के लिठसà¥à¤ªà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ थे।
सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤œà¥€ का जनà¥à¤® सनà¥
1927 में दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¤ के केरल
राजà¥à¤¯ में हà¥à¤† था।
यà¥à¤µà¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में किसी
विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में
विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ की शिकà¥à¤·à¤¾
पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने के लिà¤
परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ धन न होने के
कारण आप अपनी पढ़ाई जारी
करने के लिठसेना में
à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ हो गà¤à¥¤ उस समय à¤à¤•
कागज़ को खोजते हà¥à¤
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ शिवानंद
दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ लिखित à¤à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿
देखी जिसका शीरà¥à¤·à¤• था 'बीस
आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• आजà¥à¤žà¤¾à¤à¤‚।'
शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ के शबà¥à¤¦ थे, 'à¤à¤• टन
सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त से à¤à¤• गà¥à¤°à¤¾à¤® का
अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ बेहतर है।' इन
सीधे-सादे शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में
अंतरà¥à¤¨à¤¿à¤¹à¤¿à¤¤ शकà¥à¤¤à¤¿ और
वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• गà¥à¤£ से
पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होकर सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤œà¥€ 36
घंटे की यातà¥à¤°à¤¾ तय कर
हिमालय में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ ऋषिकेश
में सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ शिवानंद से
मिले। वहां से लौटने पर इस
संकà¥à¤·à¤¿à¤ªà¥à¤¤ यातà¥à¤°à¤¾ से उनके
मन पर इतनी गहरी छाप पड़ी
कि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने शीघà¥à¤° ही
वापिस आने का निशà¥à¤šà¤¯
किया।
दूसरी यातà¥à¤°à¤¾ के
दौरान इस यà¥à¤µà¤¾ शिषà¥à¤¯ ने
सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ शिवानंद से दो
सशकà¥à¤¤ और पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¤¾à¤²à¥€
बातें सीखीं। पहला
पाठतब सीखा जब
विषà¥à¤£à¥ देवानंद को गà¥à¤°à¥
सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ शिवानंद के सामने
à¤à¥à¤•ते समय ज़रा शरà¥à¤® और
थोड़ा-बहà¥à¤¤ घमंड का अहसास
हà¥à¤†à¥¤ तब गà¥à¤°à¥ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€
शिवानंद ने यà¥à¤µà¤¾ शिषà¥à¤¯ को
वंदनपूरà¥à¤µà¤• नमसà¥à¤•ार करके
यà¥à¤µà¤¾ छातà¥à¤° को नमà¥à¤°à¤¤à¤¾ का
पाठपढ़ाया। दूसरा पाà¤
गंगा नदी की आरती के दौरान
मिला जब शà¥à¤°à¥€ विषà¥à¤£à¥
देवानंद को हैरानी और
संदेह हà¥à¤†, और वे पूछने लगे
कि बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤®à¤¾à¤¨ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ किस
तरह पानी जैसी साधारण
वसà¥à¤¤à¥ को इतना पूजनीय समà¤
सकता है। तब गà¥à¤°à¥à¤œà¥€ ने मंद
मà¥à¤¸à¥à¤•ान के साथ उनकी तरफ
देखा जिससे उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ तà¥à¤°à¤‚त
ही सारी नदी à¤à¤• विराट,
देदीपà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ बà¥à¤°à¤¹à¤®à¤œà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿
के रूप में दिखने लगी।
ततà¥à¤ªà¤¶à¥à¤šà¤¾à¤¤ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€
शिवानंद ने उस यà¥à¤µà¤• को
आशà¥à¤°à¤® में रहने के लिà¤
आमंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया जहां वह
अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ और चिंतन करके योगी
बन सके। विषà¥à¤£à¥ देवानंद ने
तà¥à¤°à¤‚त 'हां' कहकर उतà¥à¤¤à¤°
दिया ।
दस साल तक विषà¥à¤£à¥
देवानंद ऋषिकेश में
शिवानंद आशà¥à¤°à¤® में रहे और
सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ शिवानंद दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾
योग के सà¤à¥€ पहलà¥à¤“ं में
पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ हà¥à¤à¥¤
सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ विषà¥à¤£à¥
देवानंद जलà¥à¤¦ ही हठयोग
में पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ हो गà¤à¥¤ आप
बहà¥à¤¤ ही उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹à¥€ à¤à¤µà¤‚
अविशà¥à¤°à¤¾à¤‚त करà¥à¤®à¤¯à¥‹à¤—ी थे।
à¤à¤• दिन सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ शिवानंद ने
उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दस रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ (à¤à¤• डॉलर
से कम) दिठà¤à¤µà¤‚ आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦
देकर उनसे पशà¥à¤šà¤¿à¤® में
यातà¥à¤°à¤¾ करके वेदांत की
शिकà¥à¤·à¤¾ का पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° करने को
कहा। 'लोग तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¤¾
इंतज़ार कर रहे हैं,' ये
गà¥à¤°à¥ के शबà¥à¤¦ थे।
अपनी असीमित शकà¥à¤¤à¤¿
à¤à¤µà¤‚ गूढ़ पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ से
सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ विषà¥à¤£à¥ देवानंद ने
अंतरà¥à¤°à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ शिवानंद
केंदà¥à¤°à¥‹à¤‚ की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ करके
उनका मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ किया। आज
दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में 80 से ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾
केंदà¥à¤° और सात आशà¥à¤°à¤® हैं,
à¤à¤µà¤‚ कई संबदà¥à¤§ केंदà¥à¤° और
शिकà¥à¤·à¤• à¤à¥€ हैं।
सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤œà¥€ ने पà¥à¤°à¤¥à¤®
योगशिकà¥à¤·à¤¾ के पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤£
पाठà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® का गठन किया
जिसने आज तक 15000 से ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾
योग à¤à¤µà¤‚ अधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤® के
पà¥à¤°à¤¾à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤• शिकà¥à¤·à¤•ों को
पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤£ दिया है।
परमपूजà¥à¤¯
शà¥à¤°à¥€ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ विषà¥à¤£à¥
देवानंद आपके अनेकों
होनहार कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में à¤à¤• था
पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ गंà¤à¥€à¤° शिकà¥à¤·à¤¾à¤“ं
को योग के पांच सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚तों
के रूप में सारांशित करना
जो समà¤à¤¨à¥‡ में सà¥à¤—म हो à¤à¤µà¤‚
दैनिक अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ में आसानी से
वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• हो। अपने जीवन
काल में सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤œà¥€ विशà¥à¤µ
कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ à¤à¤µà¤‚ यà¥à¤¦à¥à¤§ से
लगातार होने वाले घोर
विनाश के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ विचारमगà¥à¤¨
रहते थे। इसके फलसà¥à¤µà¤°à¥‚प
आपने हवाई जहाज़ चलाना
सीखा à¤à¤µà¤‚ à¤à¤• छोटे हवाई
जहाज़ में विशà¥à¤µ के कई
आपादगà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚
में खà¥à¤¦ उडà¥à¤¡à¤¯à¤¨ करके गà¤à¥¤
यà¥à¤¦à¥à¤§ के विनाश को रोकने
के लिठआपने न सिरà¥à¤«
विचार-विमरà¥à¤¶ पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤
करके सूचनातà¥à¤®à¤• माधà¥à¤¯à¤® को
इसके बारे में अवगत कराया,
बलà¥à¤•ि 'ओम नमो नारायण' के
मंतà¥à¤°à¥‹à¤šà¥à¤šà¤¾à¤°à¤£ का पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°
करते-करते इन विनाशित
कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ पर फूलों à¤à¤µà¤‚
शांति के परिपतà¥à¤°à¥‹à¤‚ की
वरà¥à¤·à¤¾ की।
सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ विषà¥à¤£à¥
देवानंद ने पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· रूप
से सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ रामकृषà¥à¤£à¤¾à¤¨à¤‚द
को महामंतà¥à¤° की दीकà¥à¤·à¤¾ दी,
और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ 'रामकृषà¥à¤£' का
आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• नाम दिया। बाद
में सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ रामकृषà¥à¤£à¤¾à¤¨à¤‚द
ने सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ विषà¥à¤£à¥ के हाथों
से 'योग आचारà¥à¤¯' की उपाधि
पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ की और खासतौर से
'कृषà¥à¤£ à¤à¤•à¥à¤¤' का उपाधिपतà¥à¤°
पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ किया।
सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€
रामकृषà¥à¤£à¤¾à¤¨à¤‚द के
आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• जीवन à¤à¤µà¤‚ हृदय
में परमपूजà¥à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€
विषà¥à¤£à¥ देवानंद महाराज का
महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ है।