रामकृष्णानंद स्वामी द्वारा
सार्वभौमिक प्रार्थना
मेरे प्रभु, मेरे अधरों को खोलो एवं मेरी वाणी तुम्हारा यशगान
करेगी...
मेरे आराध्य परमप्रिय प्रभु, तुम मेरे शाश्वत पिता एवं
मेरी धन्य माता हो...
मुझे अपने पावन नामों से पवित्र करो...
कृपया मेरे विनम्र एवं श्रद्धापूर्ण वंदन को स्वीकार
करने की दया एवं अनुकंपा करो....
मेरे प्रभु महान हैं, मेरे प्रभु अनंत हैं...
तुम अनंत प्रेम एवं शांति हो...
तुम अनंत प्रकाश के सागर हो...स्वच्छ एवं स्फटिक
चेतना...
तुम सत्,चिद् एवं आनंद हो...
तुम अस्तित्व, संपूर्ण ब्रम्हानन्द एवं ज्ञान हो
तुम प्रत्येक व्यक्ति एवं प्रत्येक वस्तु के सत्त्व में
बसे हुए हो...
कृपया अहंकार,क्रोध,ईर्ष्या एवं भ्रम से मेरी रक्षा
करो...
हमारे हृदय में भक्ति का अमृत भर दो...
मैं निरंतर तुम्हारा स्मरण करूं, एवं नामों एवं आकारों
के भ्रामक संसार के पीछे तुम्हारा अनुभव करूं...
मुझे तुम्हारे प्रेम का निमित्त बनने दो...
मुझे उस हर परिस्थिति से सीखने दो जो जीवन मेरे समक्ष
प्रस्तुत करता है...
मुझे सेवा,त्याग,प्यार और अवलोकन करने दो एवं नित्य
तुम्हीं में रहने दो...
तुम मेरे शब्दों,दृष्टि,मुखारविन्द एवं उपस्थिति से
गौरवान्वित रहो। ये और कुछ न रहें, केवल प्रत्येक व्यक्ति के लिए
प्रतिदिन प्रेरणा के स्त्रोत हों, उस हर क्षण के दिव्य आनंद का
सत्यापन बनकर जो तुम अकारण ही मुझपर बरसाते हो।
तुम्हारे अलावा अन्य किसी को अपने प्रभु के रूप में कभी
नहीं देखूंगा। भले ही तुम मेरे साथ दुर्व्यवहार करो या मुझे दर्शन न
देकर मेरा हृदय तोड़ दो, फिर भी मेरे हृदय में तुम्हारी जगह वैसी ही
रहेगी।
तुम जो भी चाहते हो, वह करने के लिए स्वतंत्र हो। तुम
बिना किसी प्रतिबंध के संपूर्णतः हमारे पूज्य प्रभु हो और सदैव
रहोगे।
पृथ्वी पर भी तुम्हारी वही आकांक्षा हो जैसी आकाश में
है...
हरिः ॐ तत्सत्।