पंच कुटुंब साधना

पंच कुटुंब साधना अभिभावक के लिए पांच प्रकार की मार्गदर्शिका है। यह माता-पिता के समक्ष हिंदू धर्म के प्रमुख तत्त्व प्रस्तुत करती है जो वे बच्चों को सिखा सकते हैं, शब्दों एवं व्यक्तिगत उदाहरण दोनों के द्वारा ।

 

1) धर्माचार - वचनों एवं धर्मोपदेश से ज़्यादा हमारे व्यक्तिगत उदाहरण ही हमारे बच्चों के जीवन को प्रभावित करते हैं। वे अपने बचपन में जो भी देखते हैं, वही उनके जीवन को प्रभावित करता है। कभी भी बच्चों के सामने बहस या झगड़ा न करें। यह ज़रूरी है कि माता-पिता बच्चों के समक्ष धार्मिक जीवन के चार मुख्य सिद्धांतों का पालन करें - मद्यपान का निषेध, मांसाहार का निषेध, जुए का निषेध एवं अवैध कामुकता का निषेध। यह अपेक्षित है कि माता-पिता बच्चों के सामने परंपरा का आदर करें, पिता धोती पहने और माता साड़ी, एवं ईश्वर, गुरु और आध्यात्मिक अधिकारियों के प्रति आदर व्यक्त करें।

 

2) पूजाघर - माता-पिता को अपने घर में प्रभुभक्ति के लिए, ध्यान एवं ग्रंथों के पठन-पाठन के लिए एक अलग

पूजा का स्थान होना चाहिए। पारिवारिक गुरु एवं संत-साधुओं की तस्वीरें सजाएं जो आपको प्रेरित करें। यह आवश्यक है कि घर में हम एक ऐसा स्थान बनाएं जो आध्यात्मिक एवं धार्मिक जीवन का आश्रय हो।

 

3) धर्म संभाषण - अभिभावक धार्मिक एवं आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा करने का प्रयास करें जिससे कि बच्चे उसका विश्लेषण करना सीखें एवं जीवन को एक आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देख सकें।

 

4) धर्म स्वाध्याय - जो अभिभावक अपने बच्चों को वैदिक संस्कृति की परंपरा के अंतर्गत शिक्षित करना चाहते हैं, उन्हें नियम से मंदिर के दर्शन, अपने गुरु एवं अग्रिम संतों के भाषण एवं सम्मेलन में भाग लेकर एवं प्रकटित वैदिक ग्रंथों का अध्ययन करके स्वयं को अपने आध्यात्मिक विकास के प्रति समर्पित करना चाहिए। बच्चों को शिक्षित करने के लिए हमें स्वयं को पहले शिक्षित करना चाहिए।

 

5) धर्म संघ - अभिभावक एवं घर के अन्य लोगों को एक आध्यात्मिक गुरु या शिक्षक का चयन करना चाहिए, उनके आदेश एवं मार्गदर्शन पर चलकर उनकी वंशावली की सेवा में मदद करनी चाहिए। आध्यात्मिक गुरु परिवार को मार्गदर्शन, सलाह एवं आशीर्वाद देते हैं।