परमपूज्य श्रील नरहरी दास बाबाजी महाराज



 

ॐ नमो विष्णुपादाय कृष्णप्रेष्ठाय भूतले।

श्रीनरहरिदासाय राधाखुण्डनिवासिने॥

 

परमपूज्य श्रील नरहरी दास महाराज महत्वपूर्ण आध्यात्मिक गुरुओं एवं शिक्षा गुरुओं में से एक हैं और आपका हमारे संस्थान के संस्थापक के जीवन पर सबसे गहरा प्रभाव है। इसमें कोई संदेह नहीं कि बाबाजी स्वामी रामकृष्णानंद के हृदय पर गहरी छाप छोड़ गए। वह एक महान संत, साधु, भक्तियोगी, संपूर्ण भक्त, आचार्य एवं प्रबुद्ध आध्यात्मिक गुरु थे जिन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय भारत में वृन्दावन की पवित्र भूमि पर व्यतीत किया। उनकी उपस्थिति में दिव्य शक्ति का प्रभाव महसूस होता था, वह दिव्य प्रभाव जो ऐसे व्यक्ति से उजागर होता है जिसमें सारे सत् के उद्गम एवं स्रोत की अनुभूति है। बाबाजी बारासना के परमपूज्य

श्रील नित्यानंद दास बाबाजी के क्रमागत एवं प्रत्यक्ष शिष्य थे। इस भक्तियोगी संत ने जीवन का हर क्षण अपने इष्ट राधा-कृष्ण की भक्ति के उन्माद में बिताया, वे प्रतिदिन सैंकड़ों बार महामंत्र का जाप एवं तुलसी देवी और प्रभु गिरिराज की आराधना करते थे। बाबाजी महादुर्गा और महाकाली जैसी दिव्य शक्तियों और देवी-देवताओं से प्रत्यक्ष बात करते थे। बाबाजी ने खुद रामकृष्णानंद स्वामी को भक्तियोग के जटिल मार्ग का महत्वपूर्ण एवं गूढ़ ज्ञान प्रदान किया, उनके आध्यात्मिक जीवन को दिशा दी एवं उनके हृदय में श्री चैतन्य महाप्रभु, गौड़िय प्रणाली के वैष्णव धर्म एवं श्री श्री राधा-कृष्ण के प्रति गहरी भक्ति प्रदान की। अंतकाल में बाबाजी ने हमारे आध्यात्मिक गुरु को वैदिक धर्म के ज्ञान एवं प्रचार में से अपना जीवन समर्पित करने की आज्ञा दी।

 

बाबाजी का जन्म भारत में कालीड़ा नामक गांव में हुआ था और उन्होंने 3 नवंबर, 2001 को 108 वर्ष की आयु में अपने देह का त्याग किया। इसमें कोई संदेह नहीं कि बाबाजी एक प्रबुद्ध गुरु एवं दिव्य पुरुष थे। हमारे आध्यात्मिक गुरु के जीवन-मार्ग में उनका महत्वपूर्ण स्थान है और आप हमारे संस्थान के सभी सदस्यों के लिए प्रेरणा-स्रोत हैं, और हमेशा रहेंगे।