परमपूजà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€à¤²
नरहरी दास बाबाजी
महाराज
à¥
नमो
विषà¥à¤£à¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¾à¤¯
कृषà¥à¤£à¤ªà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ ाय
à¤à¥‚तले।
शà¥à¤°à¥€à¤¨à¤°à¤¹à¤°à¤¿à¤¦à¤¾à¤¸à¤¾à¤¯
राधाखà¥à¤£à¥à¤¡à¤¨à¤¿à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¨à¥‡à¥¥
परमपूजà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€à¤² नरहरी
दास महाराज महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£
आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• गà¥à¤°à¥à¤“ं à¤à¤µà¤‚
शिकà¥à¤·à¤¾ गà¥à¤°à¥à¤“ं में से à¤à¤•
हैं और आपका हमारे संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨
के संसà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤• के जीवन पर
सबसे गहरा पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ है।
इसमें कोई संदेह नहीं कि
बाबाजी सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€
रामकृषà¥à¤£à¤¾à¤¨à¤‚द के हृदय पर
गहरी छाप छोड़ गà¤à¥¤ वह à¤à¤•
महान संत, साधà¥, à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤—ी,
संपूरà¥à¤£ à¤à¤•à¥à¤¤, आचारà¥à¤¯ à¤à¤µà¤‚
पà¥à¤°à¤¬à¥à¤¦à¥à¤§ आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤•
गà¥à¤°à¥ थे जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने
जीवन का अधिकांश समय à¤à¤¾à¤°à¤¤
में वृनà¥à¤¦à¤¾à¤µà¤¨ की पवितà¥à¤°
à¤à¥‚मि पर वà¥à¤¯à¤¤à¥€à¤¤ किया। उनकी
उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में दिवà¥à¤¯ शकà¥à¤¤à¤¿
का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ महसूस होता था,
वह दिवà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ जो à¤à¤¸à¥‡
वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ से उजागर होता है
जिसमें सारे सतॠके उदà¥à¤—म
à¤à¤µà¤‚ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ की अनà¥à¤à¥‚ति है।
बाबाजी बारासना के
परमपूजà¥à¤¯
शà¥à¤°à¥€à¤² नितà¥à¤¯à¤¾à¤¨à¤‚द दास
बाबाजी के कà¥à¤°à¤®à¤¾à¤—त à¤à¤µà¤‚
पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· शिषà¥à¤¯ थे। इस
à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤—ी संत ने जीवन का
हर कà¥à¤·à¤£ अपने इषà¥à¤Ÿ
राधा-कृषà¥à¤£ की à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ के
उनà¥à¤®à¤¾à¤¦ में बिताया, वे
पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ सैंकड़ों बार
महामंतà¥à¤° का जाप à¤à¤µà¤‚ तà¥à¤²à¤¸à¥€
देवी और पà¥à¤°à¤à¥ गिरिराज की
आराधना करते थे। बाबाजी
महादà¥à¤°à¥à¤—ा और महाकाली
जैसी दिवà¥à¤¯ शकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और
देवी-देवताओं से
पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· बात करते थे।
बाबाजी ने खà¥à¤¦
रामकृषà¥à¤£à¤¾à¤¨à¤‚द सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ को
à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤— के जटिल मारà¥à¤— का
महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¤µà¤‚ गूढ़
जà¥à¤žà¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया, उनके
आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• जीवन को दिशा
दी à¤à¤µà¤‚ उनके हृदय में शà¥à¤°à¥€
चैतनà¥à¤¯ महापà¥à¤°à¤à¥, गौड़िय
पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ के वैषà¥à¤£à¤µ धरà¥à¤®
à¤à¤µà¤‚ शà¥à¤°à¥€ शà¥à¤°à¥€ राधा-कृषà¥à¤£
के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ गहरी à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿
पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ की। अंतकाल में
बाबाजी ने हमारे
आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• गà¥à¤°à¥ को वैदिक
धरà¥à¤® के जà¥à¤žà¤¾à¤¨ à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°
में से अपना जीवन समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤
करने की आजà¥à¤žà¤¾ दी।
बाबाजी का जनà¥à¤® à¤à¤¾à¤°à¤¤ में
कालीड़ा नामक गांव में हà¥à¤†
था और उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने 3 नवंबर, 2001
को 108 वरà¥à¤· की आयॠमें अपने
देह का तà¥à¤¯à¤¾à¤— किया। इसमें
कोई संदेह नहीं कि बाबाजी
à¤à¤• पà¥à¤°à¤¬à¥à¤¦à¥à¤§ गà¥à¤°à¥ à¤à¤µà¤‚
दिवà¥à¤¯ पà¥à¤°à¥à¤· थे। हमारे
आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• गà¥à¤°à¥ के
जीवन-मारà¥à¤— में उनका
महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ है और आप
हमारे संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के सà¤à¥€
सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के लिà¤
पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾-सà¥à¤°à¥‹à¤¤ हैं, और
हमेशा रहेंगे।